ठाणे में मुख्यमंत्री ठाकरे ने किया क्लस्टर योजना का शिलान्यास ,बीजेपी ने किया बहिस्कार
ठाणे ( सतीश चौहान )
मुंबई ,06 फरवरी (हि स ) | ठाणे शहर में कई वर्षों से बहु प्रतिक्षित क्लस्टर योजना का शिलान्यास आज गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा वागले इस्टेट में किया गया | शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली वार ठाणे शहर में आये थे | हालांकि उनका यह दौरा गैर राजनैतिक ही था | फिर भी ठाणे की बीजेपी इकाई ने उनके इस कार्यक्रम का बहिस्कार किया | गौर तलब है कि इसके पूर्व भी ठाणे बीजेपी अध्यक्ष और विधायक निरंजन डावखरे ने घोषणा की थी कि ,क्लस्टर के भूमिपूजन कार्यक्रम का बीजेपी बहिस्कार करेगी | मगर आज ठाणे में मुख्यमंत्री द्वारा क्लस्टर योजना के शिलान्यास के अलावा करीब आधा दर्जन योजनाओं का भी शिलान्यास किया |
मुख्यमंत्री ठाकरे अपने इस कार्यक्रम में करीब तीन घंटे की देरी से पहुंचे थे | इस अवसर पर राज्य के नगर विकास तथा सार्वजानिक निर्माण कार्य मंत्री एकनाथ शिंदे ,गृह निर्माण मंत्री जीतेन्द्र आव्हाड पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे , ठाणे के महापौर नरेश म्हस्के ,ठाणे के सांसद राजन विचारे ,कल्याण सांसद श्रीकांत शिंदे ,विधायक रविंद्र फाटक ,सुभाष भोईर ,प्रताप सरनायक ठाणे मनपा आयुक्त संजीव जैसवाल ,पुलिस आयुक्त विवेक फणसलकर ,ठाणे जिलाधिकारी राजेश नार्वेकर आदि उपस्थित थे |
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ठाकरे ने स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री पद का कार्यग्रहण ग्रहण करने के बाद उनकी यह पहली ठाणे यात्रा है | कलस्टर योजना में घोषणा की देरी से ठाणे में घर न मिलने से लाखों लोग परेशान थे | उन्होंने नेताओं पर कटाक्ष किया कि लोग वादा कर फिर भूल जाते हैं |
अपने आखिरी सांस तक करूँगा गरीब ,असहाय,व ग्राम सभा की सेवा
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के ज्ञानपुर विकास खण्ड के अंतर्गत ग्राम सभा भिडिउरा में एक ऐसा ग्राम प्रधान मुन्ना पाण्डेय जो कि अपने कार्य,सेवा,से जाने जाते है।गांव के विकाश के लिए ग्राम प्रधान जी ने कोई कसर नही छोड़ी है।चाहे वो आवास,शौचालय, पानी,बिजली ही हो ।प्रधान जी ने बड़े ही ईमानदारी से कार्य को किया है।गांव वालों ने बताया कि प्रधान जी हमारे सुख व दुःख दोनों में हम सबकी मदद करते है।यही ही नही ग्राम प्रधान मुन्ना पाण्डेय प्रत्येक वर्ष ठंडी के महीने ठंड से बचने के लिए गरीब,असहाय,बनवासी को कम्बल वितरित करते है।इस वर्ष भी ग्राम प्रधान मुन्ना पाण्डेय ने अभी पिछले ही महीने 29दिसम्बर कम्बल वितरित किये थे।इसके बाद भी ठंड के मौसम को देखते हुए ग्राम प्रधान जी ने आज भी कम्बल वितरित किये।गरीब ,बनवासी लोग कम्बल पाकर अत्यंत खुश दिखाई पड़े।इसके अलावा ग्राम प्रधान मुन्ना पाण्डेय हर त्योहार पर भी गरीबो की मदद भी करते है।यहाँ तक गांव वालो ने बताया कि सरकारी नियमो के अलावा भी प्रधान जी मदद करते है जैसे कि अन्न वितरित करना,वस्त्र वितरित करना आदि।ग्राम के गरीब कम्बल पाकर अत्यत खुश हुए ।और सबके मुख से यही निकला कि हमारे गांव के प्रधान हमेशा प्रधान जी ही रहे सतीश चौहान कि रिपोर्ट
कोरांव महोत्सव में परदेशी ने दिया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश——————————–
1- महोत्सव में उमड़े जनशैलाब में परदेशी संग सेल्फी लेने के लिए लगी होड़
जनपद प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय कोरांव महोत्सव के अंतिम दिन पहुचे पूर्वांचल के मशहूर भोजपुरी गायक राजेश परदेशी को देखने व सुनने के लिए इस प्रकार उमड़ा जनशैलाब की पंडाल छोटा पड़ गया परदेशी ने माँ विंध्यवासिनी की स्तुति के बाद स्वच्छ भारत अभियान से लेकर अपने गीतों से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दिया तो लोगो ने जोरदार तालिया बजाकर स्वागत किया मुख्य अतिथि राज्य सभा संसद कुँवर रेवती रमन सिंह ने ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए कहा लोगो के बार बार मांग पर परदेशी ने जब ई वाला ले गीत सुनाया तो लोग थिरकने को मजबूर हो गए ततपश्चात महोत्सव के अध्यक्ष राजेश त्रिपाठी ने परदेशी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। फिर दिल्ली की गायिका पूनम पांडेय ने भी हिंदी गीत सुनाकर शमा बांध दिया स्कूली छात्राओं द्वारा प्रस्तुत संस्कृतिक कार्यक्रम को देख परदेशी ने उन छात्रओं को अपने तरफ से नगद पुरस्कार दिया। इस मौके पर एम0 एल0 पब्लिक स्कूल के प्रबंधक दुर्गा प्रसाद साहू,रामअवध कुशवाहा प्रमुख, प्रमोद प्यासी,शशि दृवेदी, ओमकार नाथ सिंह,डॉ0 अनिल पांडेय,रामेश्वर दृवेदी, रमेश तिवारी श्री कृष्ण केशरी इत्यादि लोगो सहित भारी संख्या में दूर दराज से लोगो का हुजूम लगा रहा।
मुम्बई मैजिक फन 2020 का ठाणे में शानदार आयोजन
ठाणे( सतीश चौहान )ठाणे में यंगस्टर इवेंट के द्वारा 21 जनवरी 2020 को गडकरी रंगतायन हॉल, थाने में एकदिवसीय राष्ट्रीय जादू स्पर्धा “मुम्बई मैजिक फन 2020 “का शानदार आयोजन
राष्ट्रीय जादू स्पर्धा में सीनियर केटेगरी में प्रथम स्थान पर रही महाराष्ट्र की लेडी जादूगर जेनिया, द्वितीय स्थान पर रहे गुजरात के रवि रावल एवं तृतीय स्थान पर रहे वेस्ट बंगाल के अर्पण। प्रथम पुरस्कार विजेता को इनामी राशि के तौर पे ₹ 25000/- नगद के साथ ट्रॉफी मैडल व सर्टिफिकेट दिया गया वही द्वितीय पुरस्कार विजेता को ₹ 15000/- नगद ट्रॉफी मैडल और सर्टिफिकेट दिया गया व तृतीय स्थान विजेता को ₹ 10000/- नगद के साथ साथ ट्रॉफी मैडल और सर्टिफिकेट दिए गए ।
वही ,जूनियर जादू स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त किया मास्टर जादूगर शान रावल ने, द्वितीय स्थान पर रहे मास्टर जादूगर स्पर्श एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया मास्टर जादूगर निशांत भोईर ने। इन सभी जूनियर जादूगरों को भी नगद राशि के साथ साथ ट्रॉफी, मैडल के साथ साथ सर्टिफिकेट भी दिये गए।
इस इवेंट के ज्यूरी बने थे मधुकर पडलेकर, मेंड्रेक उर्फ प्रवीण तावड़े, सुरेश राजपूत और समीर पटेल ।
इस एकदिवसीय जादू स्पर्धा का सूत्र संचालन किया सुशील ने और इनके साथ सह संचालन की भूमिका निभाई जे. सन्नी ने। इस कार्यक्रम की सफलता में मुख्य सहयोगी रहे भूपेश दवे, अतुल पाटिल दीपक पांडे, खालिद, अरविंद, चंद्रशेखर चौधरी आदि। मैजिक लवर के तौर पर मीनू तोड़ीवाला का ट्रॉफी व शाल देकर सम्मान किया गया व मुख्य सहयोगियों का भी ट्रॉफी व शाल देकर सम्मान किया गया ।
इस एक दिवसीय भव्य जादू स्पर्धा में देश भर के 150 के लगभग जादूगरों ने भाग लिया।
आम दर्शको के लिए हिंदुस्तान के स्टार जादूगरों ने अपने जादुई प्रयोगों से दर्शकों को अचंभित करते हुवे उनका मनोरंजन किया। इस खास शो के परफ़��
भदोही के कंसरायपुर में राशन कार्ड के नाम पर वसूली, ग्रामीण त्रस्त, विभाग मौन।
भदोही। सरकार भले ही भ्रष्टाचार को खत्म करने को लेकर वादे करती हो लेकिन यह हकीकत से परे है। और खुलेआम लोगो से असंवैधानिक तरीके से कुछ लोग पैसे लेते है और पैसा न देने पर कार्य न करने की बात करते है। और परेशान व विवश लोग अपना काम न होने के डर से मांगी गई रकम देकर अपना काम कराते है। और इसकी खबर विभागों को होने के बावजूद भी विभाग के लोग शिकायत का इंतजार करते है। लेकिन लोग विवाद के डर शिकायत नही करते और मनमानी करने वालों के हौसले बुलन्द है।
एक ऐसा ही मामला भदोही जिले के स्थानीय ब्लाक के अन्तर्गत कंसरायपुर में देखने को मिला जहां कोटेदार कार्ड धारकों से सौ सौ रूपया लेकर कार्ड वितरित किया है। लेकिन कोटेदार के डर वश लोग सामने आने से कतरा रहे है। इस मामले में जब ग्राम प्रधान से पूछा गया तो उन्होने इस बात को बेबुनियाद और एक साजिश बताया। विदित हो कि कंसरायपुर के ग्राम प्रधान और कोटेदार एक ही परिवार के है। और गांव में इनका दबदबा है और लोग इनकी शिकायत करने से डरते है। कंसरायपुर के कुछ लोगो ने बताया कि निर्धारित मात्रा से कम राशन देते है और अधिक दाम भी लेते है। वैसे कुछ भी है जिले में राशनकार्ड धारकों को इस तरह की समस्याओं से आए दिन सामना करना पडता है। लेकिन विभाग की कृपा से सब यूं ही चल रहा है। क्योकि एक गरीब और परेशान व्यक्ति शिकायत करके इस तरह की समस्याओं से निजात नही पा सकता। जहां पर विभाग की कृपा दृष्टि बनी हो।
मुम्बई: उत्तर भारतीय महासंघ द्वारा आयोजित भाण्डुप मारूति मंदिर लेकरोड मे श्री राम कथा के भव्य आयोजन के तृतीय दिवस पर कथावाचक व्यास शिवाकांत मिश्रा ‘सरस’ ने कहा-
मित्रलाभे तथा नष्टद्रव्यस्य च गवेषणे।
श्रुत्वा पठित्वा कैष्किन्ध्यं काण्डं तत्तत्फलं लभेत्॥
बृहद्धर्मपुराण के अनुसार ‘रामायण’ के किष्किंधाकाण्ड का पाठ करने से मित्रलाभ और बिछड़े परिजनों से मिलन होता है। मित्रता और भक्त के भाव और गुणों को समझने के लिए इस भाग को अहम माना जाता है। इस भाग में राम-हनुमान मिलन, वानर राज सुग्रीव से मित्रता, सीता को खोजने के लिए सुग्रीव की प्रतिज्ञा, बाली व सुग्रीव का युद्ध, बाली-वध, अंगद का युवराज पद, ऋतुओं का वर्णन, वानर सेना का संगठन का विस्तार पूर्वक वर्णन मिलता है। इसके अतिरिक्त हनुमान का लंका जाना, जाम्बवंत की हनुमान को प्रेरणा आदि का व्याख्या की गई है। किष्किंधा काण्ड मे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने मित्र किसे कहते है उसका बखूबी छाप छोड़ी है उनके इन समय के लिलाओ मे साफ है,कि जो मित्रता अपने मित्र के काम नहीं आये उसे मित्रता नहीं कहते। सुग्रीव ने भगवान श्री राम के मित्रता पर विश्वास किया जिससे सिद्ध हो गया किविश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती है। जिसे ऎसा मित्र मिल जाये उसे समझना चाहिए कि खजाना मिल गया। बजरंगबली ने सुग्रीव के साथ मित्रता किष्किंधा काण्ड मे साफ तौर पर दर्शाता है किहमारे और हमारे मित्र के बीच सच्ची सहानुभुति होनी चाहिए- ऎसी सहानुभूति जिससे एक के हानि-लाभ को दूसरा अपना हानि-लाभ समझे। मित्रता के लिए यह आवश्यक नही है कि दो मित्र एक ही प्रकार का कार्य करते हों या एक ही रूचि के हो। मर्यादा पुरुषोत्तम के साथ घटित घटनाओं ने किष्किन्धा काण्ड मे मित्रता की व्याख्या से ओतप्रोत करती हैं। भगवान को वनगमन मे सुग्रीव, हनुमानजी, जामवंत आदि का �
हनुमान जी की सेवा भावना और परायणता ऐसी अद्भुत थी,स्वंय भगवान उनके ऋणी हो गये
मुम्बई: भाण्डुप मे उत्तर भारतीय महासंघ द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय भव्य श्री राम कथा के आयोजन मे कथावाचक व्यास श्री शिवाकांत मिश्रा ‘सरस’ ने दुशरे दिन की कथा को सुनाते हुए कहा कि
सम नहिं बड़भागी I नहीं कोउ राम चरन अनुरागी ।।
उत्तर कांड मे है जहा श्री राम जी चारो भाइयो एवं हनुमान जी सहित बगीचे मे हैं | हनुमान जी पंखा झल रहे हैं यह देख पार्वती जी से भोला बाबा कह रहे हैं कि देखिए यहॉ श्री राम अपने अन्य तीनो अंशो के साथ है और मै श्री राम को पंख झल रहा हू मेरे जैसा बड़भागी कौन होगा जो श्री सरकार के चरन अनुरागी है । श्री सरकार के अन्य तीनो भाई भी उन्ही के अंश है इसलिए वो चरन अनुरागी तो होगे नही न ,बचा मै हनुमान रुप मे तो यह मेरा बडे भाग्य की ही तो बात है।
पर केवल इसी कारण हनुमान जी बड़भागी और रामचरण अनुरागी नही है बल्कि श्री हनुमानजी की सेवा भावना और परायणता ऐसी अद्भूत थी कि श्री सरकार, लखन लाल ,भरत जी, मईया सीता सहित समस्त अवध वासी भी उनके ऋणी बन गए थे।
इतना महान होकर भी बीर बजरंगी श्री राम जी के समक्ष सदैव निराभिमानता की प्रतिमूर्ति ही रहे। उनकी यह निरहंकारिता अनेक स्थलो पर देखने मे आती है। जब श्री पवन सुत लंका से मईया की खबर लेकर आते हैं और श्री राम जी सब जानकर उनकी सराहना करने लगते हैं तब दैन्य की मूर्ति अञ्जनी नंदन बडी विनम्रता से कहते हैं,ऐसे ही निरभिमानी श्री हनुमान जी के प्रति सभी अवध वासी भी चिर ऋणी है वन गमन के समय मईया कौशल्या कहती है कि
अवधि अंबु प्रिय परिजन मीना।तुम करुनाकर धरम धुरीना।।
अस बिचारि सोइ करहु उपाई।सबहि जिअत जेहि भेंटहु आई।।
श्री राम जी के वन गमन के बाद सब लोग उनके दर्शन हेतू नियम उपवास करने लगे
राम दरस लगि लोग सब करत नेम उपबास। तजि तजि भूषण भोग सुख जिअत अवधि कीं आस।।
अब प्रतिज्ञावधि बीतने को आयी है एक दिन शेष रह गया है श्री भरत जी कुशासन पर बैठ कर प्रतीक्षा करने लगे। भरत जी सोच रहे हैं कि आज श्री राम नही आये तो अयोध्या वासी मर जाएगे ।जल रुपी सरकार ही नही रहेगे तो प्रजा रुपी मछली कैसे जियेगी। यह सोच कर भरत जी ही अपने शरीर का सबसे पहले स्वंय त्याग करना चाहा ,उसी समय श्री हनुमान जी
भरत जी की स्थिति देखकर हनुमान जी गदगद हो गये और पुनः श्री राम आगमन का समाचार सुनाकर श्री हनुमान जी ने न केवल भरत जी अपितु सम्पूर्ण अवध वासियो के जीवन की रक्षा की। जिस प्रकार से हनुमान जी के श्री भरत जी, माता कौशल्यादि जी तथा अवध वासीगण ऋणी हैं उसी प्रकार श्री राम जी,लखन जी, और सीता जी भी ऋणी हैं। संजीवनी बुटी लाकर जहा लखन जी का जीवन बचाए वही लखन जी के वियोग मे विलाप करते हूए श्री राम जी को भी प्रसन्न कर अपना ऋणी बनाए।
इसी प्रकार कृतज्ञ हैं भगवती मईया भी हनुमान जी की लंका विजय के बाद श्री राम जी ने मईया के पास इनको भेजे जहा दर्शन और नमन के उपरान्त मईया से कहते हैं
सब बिधि कुसल कोसलाधीसा।मातु समर जीत्यो दससीसा।।
यह सुनते ही मईया के ह्रदय मे अत्यन्त हर्ष हुआ। उनका शरीर पुलकित हो गया और वो खुशी के आसु युक्त आखो मे भरे हुए बार बार बोलने लगी
का देउँ तोहि त्रैलोक महँ कपि किमपि नहिं बानी समा।
बजरंग बलि कहते है। दूसरा दूत रहता तो क्या नही मांग लेता पर,मंगलमूर्ति हनुमान जी सकल अमंगलों को मूल से विनष्ट कर देते हैं। उनका चरित अपार है, अनंत है ।
हनुमान जी मानस में पंचप्राणों के रक्षक हैं । कंब रामायण के अनुसार ये “मुख्यप्राण” हैं।
हमारे शरीर में पंचप्राण-प्राण,अपान,समान, व्यान और उदान हैं । मानस के पंचप्राण -सीता जी,भरत जी, लक्ष्मण जी, सुग्रीव जी और बंदर हैं,हम जानते हैं कि सीता जी को अशोक वाटिका में जाकर,श्री राम वनगमन की अवधि पूरी होने पर भरत जी के लिए अयोध्या जाकर, लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर रातों रात संजीवनी लाकर, सुग्रीव को जब लक्ष्मण क्रोधित होकर मारने आए तब समझाकर और प्यासे बानरों को गुफा में ले जाकर-इन सभी के प्राणों की रक्षा हनुमान जी ने की।
ऐसी महान सेवा से ही श्री हनुमान जी ने सभी को ऋणी बना लिए | हनुमान जी जैसा भाग्यवान कौन होगा। इस भव्य राम कथा के आयोजन की संयोजिका अधिवक्ता योगिता अनुपम दुबे ने बताया की कथा का श्रवण करने नगरसेवक सुरेश कोपरकर,विधायक रमेश कोरगावकर,एच एन सिंह, के आर सिंह,बाबूलनाथ दूबे,महेन्द्र तिवारी, गुलाब दुबे आदि मैजुद रहे। दुशरे दिन की कथा समाप्ति पर संस्था अध्यक्ष मंगला शुक्ला ने सभी श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए उनसे और लोगों को आमंत्रित करके कथास्थल तक लाने की अपिल किये।
दुरंतो एक्सप्रेस को कल्याण रुकने के लिए सांसद को दिए पत्रक
आज दिनांक 15 जनवरी 2020 को कल्याण लोकसभा के लोकप्रिय सांसद माननीय डॉ श्रीकांत शिंदे साहब से विनित पाण्डेय (उपशहर संघटक कल्याण) व विशाल पाण्डेय (विभाग संघटक कल्याण)ने मुलाकात कर कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा किये।जिसमें प्रमुख रूप से लोकमान्य तिलक टर्मिनस से प्रयागराज (इलाहाबाद) तक चलने वाली गाड़ी नंबर 12293 /12294 दुरंतो एक्सप्रेस कल्याण स्टेशन पर नही रुकती।जिससे कल्याण डोम्बिवली में रहने वाले उत्तर भारतीयों को यात्रा करने में असुविधा होती है। इसे ध्यान में रखते हुए विनीत पांडे उप शहर संघटक कल्याण व विशाल पांडे विभाग संघटक कल्याण ने सांसद डॉ श्री कांत शिंदे साहब को आग्रह पत्र देकर दुरंतो एक्सप्रेस को कल्याण में रोकने का अनुरोध किये।और सांसद महोदय ने आश्वासन भी दिया कि वे जल्द ही रेलवे अधिकारियों से बात करके हर संभव प्रयास करेंगे
सतीश चौहान महाराष्ट्र

दुरंतो एक्सप्रेस को कल्याण रुकने के लिए सांसद को दिए

पत्रक
आज दिनांक 15 जनवरी 2020 को कल्याण लोकसभा के लोकप्रिय सांसद माननीय डॉ श्रीकांत शिंदे साहब से विनित पाण्डेय (उपशहर संघटक कल्याण) व विशाल पाण्डेय (विभाग संघटक कल्याण)ने मुलाकात कर कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा किये।जिसमें प्रमुख रूप से लोकमान्य तिलक टर्मिनस से प्रयागराज (इलाहाबाद) तक चलने वाली गाड़ी नंबर 12293 /12294 दुरंतो एक्सप्रेस कल्याण स्टेशन पर नही रुकती।जिससे कल्याण डोम्बिवली में रहने वाले उत्तर भारतीयों को यात्रा करने में असुविधा होती है। इसे ध्यान में रखते हुए विनीत पांडे उप शहर संघटक कल्याण व विशाल पांडे विभाग संघटक कल्याण ने सांसद डॉ श्रीकांत शिंदे साहब को आग्रह पत्र देकर दुरंतो एक्सप्रेस को कल्याण में रोकने का अनुरोध किये।और सांसद महोदय ने आश्वासन भी दिया कि वे जल्द ही रेलवे अधिकारियों से बात करके हर संभव प्रयास करेंगे।

ईश्वर कभी नहीं भूले इंसान-कथाव्यास सुनील ओझा जी महराज


ब्राम्हण समाज सांस्कृतिक संस्था द्वारा डोम्बिवली में चल रहे श्रीमद भागवत कथा में कथा व्यास श्री सुनील ओझा जी महराज ने कहा कि कि कृष्ण का जन्म इसलिए हुआ कि धरती पर कोई दुष्ट प्रभु की भक्ति करने से ना रोके। उनके कारण ही आप यहां पर भागवत सुन रहे हैं। इसलिए इंसान को कभी ईश्वर को नहीं भूलना नहीं चाहिए। इसलिए इंसान को जीवन मे अच्छे कर्म करे, जिससे कि उसका आने वाला जीवन अच्छा व्यतीत हो। जीवात्मा को अपनी बाणी का संयम से प्रयोग करना चाहिए। जब-जब मनुष्य ईश्वर भक्ति के सनातन-पुरातन मार्ग को छोड़कर मनमाना आचरण करने लगता है तो इससे धर्म के संबंध में अनेक भ्रांतियां फैल जाती हैं। धर्म के नाम पर विद्वेष, लड़ाई-झगड़े, भेद-भाव, अनैतिक आचरण होने लगता है तब प्रभु अवतार लेकर इन बाह्य आडंबरों से त्रस्त मानवता में ब्रह्मज्ञान से प्रत्येक मनुष्य के अंदर वास्तविक धर्म की स्थापना करते हैं
पवन पुरवईया न्यूज़ से सतीश चौहान कि रिपोर्ट