ट्रक के धक्के से युवक की घटनास्थल पर दर्दनाक मौत।


गोपीगंज। रास्ट्रीय राजमार्ग के मिर्ज़ापुर तिराहे के पास ट्रक की चपेट में आने से एक अज्ञात युवक 25 की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत।
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना के संबंध में बताया जाता है कि साईकिल सवार युवक बाजार से संभवतः अपने घर की तरफ वापस जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही मिर्ज़ापुर तिराहे के समीप पहुंचा ही था कि पीछे से आ रही ट्रक ने साईकिल सवार युवक को पीछे से धक्का मारा जिससे खराब सड़क होने की वजह से वही पर गिर गया और ट्रक ड्राइवर कंट्रोल नही कर पाया और ट्रक की चपेट में आ गया वही घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। नागरिकों के शोर करने पर ड्राइवर गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने युवक की शिनाख्त कराने की कोशिश की पर शिनाख्त नही हो पाया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही ट्रक को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्यवाही कर रही है। समाचार लिखे जाने तक शिनाख्त नही हो पाई थी। देखने और पढ़ने के लिए बने रहिए पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

ट्रक के धक्के से युवक की घटनास्थल पर दर्दनाक मौत।


गोपीगंज। रास्ट्रीय राजमार्ग के मिर्ज़ापुर तिराहे के पास ट्रक की चपेट में आने से एक अज्ञात युवक 25 की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत।
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना के संबंध में बताया जाता है कि साईकिल सवार युवक बाजार से संभवतः अपने घर की तरफ वापस जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही मिर्ज़ापुर तिराहे के समीप पहुंचा ही था कि पीछे से आ रही ट्रक ने साईकिल सवार युवक को पीछे से धक्का मारा जिससे खराब सड़क होने की वजह से वही पर गिर गया और ट्रक ड्राइवर कंट्रोल नही कर पाया और ट्रक की चपेट में आ गया वही घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। नागरिकों के शोर करने पर ड्राइवर गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने युवक की शिनाख्त कराने की कोशिश की पर शिनाख्त नही हो पाया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही ट्रक को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्यवाही कर रही है। समाचार लिखे जाने तक शिनाख्त नही हो पाई थी। देखने व पढ़ने के लिए बने रहिए पवन पुरवईया न्यूज़ पर पूरे सतीश चौहान के साथ

मुख्यमंत्री जी! ‘उत्तर प्रदेश सरकार’ लिखी गाड़ी का बीमा फेल क्यो?

भदोही। सरकार भले ही यातायात को सुचारू ढंग से चलाने के लिए नियम कानून बनाई है। और बनाये गये नियम कानून का पालन कराने में स्थानीय पुलिस और प्रशासन के लोग काफी सक्रिय रहते है। जिसका उदाहरण बाजार और नगर में देखा जा सकता है। और खास बात यह भी दिखती है कि प्रशासन के इस सख्ती में अधिकतर सामान्य आदमी ही पकडा जाता है। क्योकि कुछ लोग पुलिस होते है तो कुछ सत्ता दल के नेता के आदमी या कार्यकर्ता या कुछ लोग परिचित तो कुछ लोग पत्रकार होते है जिन पर पुलिस के लोग कार्यवाही बहुत कम संख्या में देखे जाते है। और इसी पक्षपात की वजह से लोग सरकार और सरकारी कार्य के नाम पर खुलेआम धज्जियां उडाते है। और जिम्मेदार लोग भी ऐसे लोगो के सामने अपनी जिम्मेदारी भूल जाते है।
एक ऐसा ही मामला सोमवार को भदोही जिले के गोपीगंज थाना अन्तर्गत दिखा जहां पर एक ऐसी इनोवा गाडी(UP 70 EK 2525) देखी गई जिस पर लिखा तो है उत्तर प्रदेश सरकार लेकिन साहब के गाडी का इन्सुरेंस डेढ माह से फेल है। लेकिन साहब पर इसका कोई फर्क नही है क्योकि गाडी पर जो उत्तर प्रदेश सरकार का लेवल लगा है। साहब की बात तो छोडिये। पिछले डेढ महिने से यह इनोवा गाडी पता नही कहा कहा गई होगी लेकिन साहब को कोई यह नही बताया कि गाडी का इन्सुरेंस फेल है। या हो सकता है कि कोई साहब को बताया भी हो लेकिन साहब को तो किसी का तनिक भी भय नही था क्योकि गाडी पर जो उत्तर प्रदेश सरकार जो लिखा है। लेकिन यह इनोवा कार सोमवार को तब पकड में आई जब जंगीगंज में एक साइकिल सवार को टक्कर मारते हुए आगे निकल गई। और सरकार के नाम पर समाज को गुमराह करने वाले साहब की पोल खुल गई। अब यहां सवाल पैदा होता है कि आखिर इस तरह लोग सरकार के नाम को अपने गलत कार्यों से क्यों बदनाम करते है? सरकार को इस तरह की लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। और स्थानीय प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है कि सभी के साथ समान व्यवहार करे। न कि केवल आम आदमी के साथ सख्ती और खास आदमी के साथ नरमी से पेश आये।देखने व पढ़ने के लिए बने रहिये पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

देश में ‘प्रतियोगी’ युवाओं के ‘अच्छे दिन’ की शुरूआत।


देश में आज भी युवा सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देते है और उनका सपना रहता है कि वे पढ लिखकर एक अच्छे पद पर जाकर सरकारी नौकरी करेंगे और देश व समाज की सेवा करेंगे। लेकिन सरकारी नौकरी पाने के लिए कितनी मेहनत और लगन की जरूरत होती है यह किसी प्रतियोगी युवा से अधिक कोई नही जान सकता है। और यही मेहनत और लगन उस युवा को आगे बढने में सहायक होता है। लेकिन सरकारी नौकरी पाने में कुछ ऐसी भी दिक्कते पाई जाती है जो प्रतियोगी के मेहनत और लगन से अलग होती है। वे चीजे है परीक्षाओं की अधिकता, परीक्षा केन्द्रों की दूरी, भाषा की समस्या इत्यादि लेकिन अब सरकार ने करीब हर वर्ष तीन करोड़ प्रतियोगी परीक्षा में सम्मिलित होने वाले युवाओं के समस्या को ध्यान में रखकर एक अहम फैसला लिया है। जो बेशक प्रतियोगी युवाओं के लिए काफी ‘सहायक’ साबित होगा।
केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेडकर ने सरकार के तरफ युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं मे ‘राहत’ की घोषणा की। जिसमें बताया गया कि अगले वर्ष से एसएससी, बैंक और रेलवे के लिए आयोजित होने वाली प्रारम्भिक परीक्षा अलग अलग न होकर अब केवल एक ही होगी। जिसमें युवा अपने स्वेच्छा से एसएससी, बैंक अथवा रेलवे की मुख्य परीक्षा में अगले तीन वर्ष तक सम्मिलित हो सकेगा। इस बदलाव से उन युवाओं को काफी सहूलियत मिलेगी जो इन विभागों की प्रारम्भिक परीक्षा की अलग अलग तैयारी करते थे। अब केवल ‘कामन इलिजबिलिटी टेस्ट’ के माध्यम से प्राप्त अंकों के हिसाब से बैंक, रेलवे और एसएससी की मुख्य परीक्षा में सम्मिलित होने का मौका मिलेगा।
पहले विभिन्न परीक्षाओं को आयोजित कराने के लिए करीब दो दर्जन एजेंसियां कार्य करती थी लेकिन अब केवल ‘नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी’ के माध्यम से परीक्षाएं आयोजित कराने का प्रावधान है। युवाओं के लिए राहत भरी खबर यह भी है कि अब इन परीक्षाओं को हिन्दी, अंग्रेजी के अलावा अपनी क्षेत्रीय भाषा में भी देने का विकल्प चुन सकते है। जो प्रतियोगी युवाओं के लिए काफी अच्छा विकल्प है। इस बदले हुए तरीके में अब केवल बडे शहरों में ही परीक्षाएं आयोजित नही होंगी बल्कि देश के सभी जिलों में इसका आयोजन होगा। जिससे युवा अपने जिले के बाहर जाने वाली समस्या से मुक्त रहे। हालांकि परीक्षा केन्द्र चुनने का विकल्प परीक्षार्थी पर ही रहेगा। वह अपने विकल्प के माध्यम से शहर चुन सकता है जहां वह प्रारम्भिक परीक्षा देना चाहता है। इस परिवर्तन के बाद महिला प्रतियोगियों को काफी सहूलियत रहेगी जो दूर आयोजित होने वाली परीक्षाओं में काफी दिक्कतों का सामना करती थी। इस बदलाव के बाद काफी राहत रहेगी। इस बदलाब के बाद परीक्षा में ‘भीड’ की कमी भी देखने को मिल सकती है। क्योकि अभी तक एक ही युवा अलग अलग परीक्षाओं के लिए अलग अलग आवेदन करता था। जो कही न कही भीड बढाने मे सहायक होता था लेकिन इस बदलाव के बाद एक ही आवेदन के माध्यम से युवाओं को तीन प्रारम्भिक परीक्षाओं में बैठने से छुटकारा मिल जायेगा। और अगले दिन वर्ष तक बैंक, रेलवे और एसएससी की मुख्य परीक्षा में सम्मिलित हो सकता है। इस बदलाव से बेशक युवाओं के दिमाग में जो परीक्षा को लेकर तनाव बना रहता है उससे काफी राहत मिलेगी। और युवा पूरे मनोयोग से अपनी प्रारम्भिक परीक्षा की तैयारी करेगा।
सरकार के इस फैसले के बाद भविष्य में प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए ‘अच्छे दिन’ की शुरूआत है जो उनके कैरियर के लिए एक सही मार्ग प्रशस्त कर रहा है। अभी हाल ही में सरकार ने शिक्षा नीति में बहुत ही उम्दा बदलाव करके विद्यार्थियों के लिए एक ‘सरल’ और ‘सही’ निर्णय लिया ठीक उसी तरह सरकार अब प्रतियोगी परीक्षाओं में भी ‘सरलीकरण’ करके प्रतियोगियों के मन में उर्जा का संचार कर दिया। बेशक सरकार के इस फैसले से युवाओं को काफी राहत मिलेगी और वे अपने लक्ष्य को पाने में और मजबूत साबित होंगे।देखने व पढ़ने के लिए बने रहिये पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

श्रद्धा और विश्वास का महापर्व , पितृपक्ष


पूर्वजों को श्रद्धासुमन अर्पित करने का महापर्व है, पितृपक्ष। कहा गया है जो श्रद्धा से किया गया हो उसे श्राद्ध कहते हैं। देवऋण, ऋषिऋण और पितृऋण यह तीन ऋण हमारे शास्त्रों में हमें बतलाया गया है। प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अश्वनी कृष्ण अमावस्या तक पितृपक्ष, श्राद्ध होते हैं। श्राद्ध यानी श्रद्धा , ब्रह्मपुराण के अनुसार जो भी वस्तु उचित कार्य अथवा स्थान पर पितरों के नाम उचित विधि-विधान द्वारा ब्राह्मणों को श्रद्धा पूर्वक प्रदान किया जाए वह श्राद्ध कहलाता है। श्राद्ध में तिल, चावल, जौ आदि का अधिक महत्व है, साथ ही पुराणों में इस बात का उल्लेख है कि श्राद्ध में तिल और कुशा का सर्वाधिक महत्व होता है। वैदिक परंपरा के अनुसार पितरों का श्रद्धा से श्राद्ध करना उत्कृष्ट कार्य हैं। एक पुत्र का जीवन तभी सार्थक है, जब वह अपने जीवित माता-पिता की सेवा करें और उनके मरणोपरांत उनकी मृत्यु-तिथि पर पितृपक्ष में उनका श्रद्धा-पूर्वक, विधि-विधान से श्राद्धकर्म करें। मान्यता अनुसार पितृपक्ष में पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का सहज उपाय है। गया, गंगासागर, कुरुक्षेत्र, चित्रकूट, पुष्कर, हरिद्वार सहित अन्य तीर्थ स्थलों में पितरों को श्रद्धा पूर्वक श्राद्धकर्म किया जाता है। सनातन धर्म और वैदिक मान्यताओं में पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का सहज व सरल मार्ग भी माना जाता है। श्राद्धपक्ष का महात्म्य उत्तर व
उत्तरपुर्व-भारत में अधिक है। दक्षिण भारत व महाराष्ट्र के विभिन्न अंचलों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यह भी मान्यता है कि पितृपक्ष में किए गए दान से पितरों की आत्मा को संतुष्टि मिलती है और पितृदोष भी समाप्त हो जाता है। श्राद्ध के दौरान गाय,घृत, अनाज, वस्त्र, तिल, भूमि, नमक आदि दान करने का भी परंपरा सदियों से चला आ रही है। ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितरगण धरती पर अपनों के पास आते हैं और अमावस्या को उनकी विदाई होती है। इस दिन श्रद्धा से श्राद्ध व दान करने व धूप, दीप, नैवेद्य अर्पण करने से मानसिक शांति के साथ घर में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता यह भी है कि इस अमावस्या को पितृगण अपने परिजनों के द्वार श्रद्धादि की इच्छा लेकर आते हैं, यदि उन्हें श्रद्धा पूर्वक पिंडदान आदि न किया जाए तो वह असंतुष्ट ही वापस चले जाते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में नाना प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है इसलिए श्रद्धा पूर्वक विश्वास के साथ श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। पितृपक्ष का श्राद्ध मूलतः एक पारिवारिक कृत्य हैं।, भारतीय सनातन परंपरा में अपने दिवंगत माता-पिता के लिए प्रतिवर्ष पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान करने का शाष्त्रीय विधान है। वायुपुराण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि श्राद्ध करने की दृष्टि से अपने पुत्र को गया में आया हुआ देख पितृगण अत्यंत प्रसन्न होकर उत्सव मनाते हैं।वर्तमान समय में अत्यंत ध्यानागत तथ्य यह है कि आज परिवार का वह सदस्य, जो पुत्र के रूप में परिवार को संचालित कर रहा है, वह अपने पुत्र का पिता भी है, वह अपने पोते का दादा भी है, अर्थात अपनी जिन दिवंगत तीन पीढ़ियों का वह श्रद्धा पूर्वक श्राद्ध कर रहा है, उसके पीछे उतनी ही पीढियां खडी है। आज वह पुत्र के रूप में अपने पिता को जो श्रद्धा से श्राद्ध निवेदित कर रहा है, वहां उपस्थित उसका पुत्र को भी इस दायित्व का बोध भी होता है। इस प्रकार संबंध का यह श्रृंखला सतत चलता रहता है। इस प्रकार श्रृंखला-सेतु बनाने का यह पावन पर्व पितृपक्ष ही है। परिवार का वह बाल-सदस्य जो अपने दिवंगत पूर्वजों से अपरिचित रहता है, इस अवसर पर वह कौतूहलवश सब का परिचय पूछता है। इस प्रकार पारिवारिक संबंधों के सुदृढ़ीकरण में पितृपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज के न्यूक्लियर फैमिली सिस्टम में भले ही भौतिक संसाधनों की प्रचुरता हो, उसमें आधुनिक सुख-साधन के सारे यंत्र-तंत्र मौजूद हों परंतु वहां के सारे संबंध में ताप-तनाव,कुंठा, संत्रास से सत्रंस्त हैं, उनका एकमात्र कारण है, उपयुक्त पारिवारिक संबंधों की व्यापकता का आभाव, सचमुच यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। जब हम तर्पण के समय पितरों को मन से याद करते हैं तो उस समय उनके साथ अपने पारिवारिक संबंधों को भी याद अवश्य करते हैं, उनका चलचित्र सम्मुख प्रकट हो ही जाता है। इससे सहज ही उनके अतीत के सारे सुकृत्य सामने आ जाते हैं। हमारे मन-प्राण भावुक हो जाते हैं। ना केवल हाथ की अंगुलियों वरन दोनों आंखों की अश्रू धाराओं से तर्पण होने लगता है। सच तो यही है कि परिवार मात्र ईट, पत्थर, सीमेंट से बना घर नहीं है, वह इस सात्विक संबंधों का पावन समुच्चय है। इन्हीं संबंधों से एक आदर्श परिवार को सुरक्षित एवं संरक्षित रखा जा सकता है। आज के आज के टूटते-बिखरते, पारिवारिक परिवेश में पितृयज्ञ एक संजीवनी की तरह है जो सभी परिस्थितियों में पारिवारिक संबंधों का कायाकल्प करने की क्षमता रखता है। आवश्यकता है तो सिर्फ व्यक्ति मे श्रद्धा भाव की वह भी पूर्ण विश्वास के साथ।देखने व पढ़ने के लिए बने रहिये पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

टीएमटी बसों में अनियमितताएं ,सदस्य शमीम ने किया स्टिंग ऑपरेशन

मुंबई,ठाणे संवाददाता सतीश चौहान ठाणे पिछले दिनों से कई यात्रियों की शिकायत थी कि मुंब्रा-कौसा-शील क्षेत्र में टीएमटी बसों के कर्मचारी अपनीड्यूटी नहीं कर रहे थे। इसलिए, परिवहन सदस्य शमीम खान ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया और कर्मचारियों को वस्तु स्थिति से अवगत भी करा दिया । पीड़ित बस यात्रियों का कहना है कि हालाँकि, फिर भी, मानवीय दृष्टिकोण से, शमीम खान को इन कर्मचारियों को सबक जरूर सिखाना चाहिए; लेकिन, उन्हें निलंबित मत करो।
पिछले कुछ दिनों मिल रही शिकायतों के बाद , शमीम खान ने आवास मंत्री जितेंद्र आव्हाड टीएमसी समूह के नेता, नजीब मुल्ला, विपक्ष की नेता प्रमिला केनी, श्रीमती रीता अवहाद, नगरसेवक शानू पठान, , शहर अध्यक्ष आनंद परांजपे के निर्देश पर स्टिंग ऑपरेशन किया।
शमीम खान ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर मुंब्रा में स्टिंग ऑपरेशन के दौरान यात्रियों के अनुरोध पर एक लैपटॉप बैग अपने कंधे पर ले लिया था , और उक्त बस को नहीं रोका। जिस बस में खान ने यात्रा की, उसमें यात्रियों से अनुरोध के बावजूद बस को हर पड़ाव पर नहीं रोका गया।
उसी समय टीएमटी के निर्धारित मार्ग , मुंब्रा रेलवे स्टेशन के सामने बस चलाने के बजाय, इसे फ्लाईओवर पर ले जाया गया, जिससे यात्रियों को काफी असुविधा हुई। उसी समय, सदस्यों ने पाया कि जो यात्री एक स्टॉप पर चढ़ा था, वह टिकट प्राप्त किए बिना दूसरे स्टॉप पर उतर गया था।
जैसे ही शमीम खान ने परिवहन प्रबंधक किशोर गवास को मामले की सूचना दी, उन्होंने गैर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया। हालांकि, लॉकडाउन ने सभी की वित्तीय स्थिति को खराब कर दिया है। इसलिए, उन्हें शमीम खान ने कहा कि उन्हें निलंबित करने के बजाय अन्य माध्यमों से सबक सिखाने के लिए कहा ।
इस बीच, शमीम खान के सुझाव पर, टीएमटी अधिकारियों ने मुंब्रा-कौसा क्षेत्र का दौरा भी किया। यात्रा के दौरान, रेतीबंदर और कौसा के बीच 39 बस स्टैंड स्थापित करने के आदेश दिए गए थे।
इस स्टिंग ऑपरेशन में शमीम खान के साथ मुमताज शाह, मुफ्ती अशरफ, जावेद मेडिकल, मुन्ना चौगले, इम्तियाज उर्दू, महफूज मामा और रफी मुल्ला शामिल थे।

लाल कालीन विवियाना मॉल में वापस
विवियाना मॉल भाग्यशाली संरक्षक का स्वागत करता है!

मुंबई, ठाणे संवाददाता सतीश चौहान ठाणे महा नगर पालिका (टीएमसी) द्वारा बुधवार से ठाणे में मॉलों को फिर से खोलने की अनुमति देने के बाद ग्राहकों के स्वागत के लिए करीब छह महीने के लॉकडाउन के बाद विवियाना मॉल ने लाल वेरिफाइड कालीन बिछा कर ग्राहकों का स्वागत किया हैं।

विवियाना मॉल द्वारा आज दी गई जानकारी अनुसार पहले कुछ आगंतुकों को लगभग छह महीने की अवधि में लॉकडाउन के बाद पहले ग्राहक के रूप में मॉल जाने की सुविधा थी। पहले 10 दिनों के लिए हर दिन, 10 ग्राहकों को एक आश्चर्यजनक उपहार मिलेगा। इन 10 व्यक्तियों को दिन 10 के दौरान बेतरतीब ढंग से चुना जाएगा और उन्हें एक उपहार दिया ।

विस्तारित ब्रेक के बाद भव्य फिर से खुलने के दिन मॉल लौट रहे दुकानदार लाल कालीन से चलेंगे। दुकानदारों को शाही स्वागत देने के लिए प्रवेश द्वार पर भव्य उत्सव का माहौल बनाया है ।

मॉल में सेल्फी पॉइंट भी आम क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर विशेष सजावट और स्थापना के साथ स्थापित किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि हमारे संरक्षकों की सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रोटोकॉल आवश्यक हैं। सुश्री रीमा कीर्तिकर, मुख्य विपणन अधिकारी, विवियाना मॉल ने कहा, “उद्योग के बेंचमार्क के साथ स्वच्छता और स्वच्छता, सतर्कता कर्मचारी और मॉल भागीदार यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे ग्राहकों को न केवल एक महान अनुभव प्राप्त हो, बल्कि यह सुरक्षित और स्वस्थ भी हो। “

“हम सभी मॉल के फिर से खुलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। एक जिम्मेदार शॉपिंग सेंटर के रूप में हमने आपके परिसर को सुरक्षित करने के लिए हर संभव सावधानी बरती है। हम और सभी आगंतुकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए कोविद -1 सुरक्षा के सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें।
विवियाना मॉल के सीईओ मनोज अग्रवाल ने बताया कि एक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के रूप में, हर रात मेहमानों के स्वागत के लिए पूरे मॉल क्षेत्र को कीटाणुरहित किया जाएगा। हमने नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए कई अन्य उपायों को अपनाया है। मॉल की सुरक्षा और स्वच्छता प्रक्रियाओं को लंदन में RSM संस्थान परामर्श द्वारा प्रमाणित किया गया सोना है ।

मॉल के प्रबंधन ने सभी प्रवेश द्वारों पर एक सफाई सुरंग लगाई है, जिसमें पराबैंगनी अंकुरण विकिरण (UVGI) उपचार और बैग स्कैनिंग शामिल हैं। कोयला को लगातार साफ और कीटाणुरहित रखने के लिए यूवीजीआई तकनीक को एयर कंडीशनिंग सिस्टम में शामिल किया गया है। अन्य एहतियाती उपायों जैसे कि लेव मार्किंग, फूड कोर्ट में अंतराल, स्टोर तक सीमित पहुंच, बढ़ती स्वच्छता, नियमित रूप से गहरी सफाई और चिमनी के लिए विवियाना मॉल प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है।

इसके अलावा, मॉल ने अपने रक्षक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पराबैंगनी विकिरण (यूवी किरणों) के साथ मॉल के सभी सामान्य क्षेत्रों को कीटाणुरहित करने की पूरी कोशिश की है। विवियाना मॉल ने नीचे से ऊपर की तरफ एस्कलेटर बेल्ट्स को साफ करने के लिए यूवी लाइट्स लगाई हैं।

VIVIANA MALL के बारे में: विविआना मॉल, एक प्रसिद्ध ‘डेस्टिनेशन मॉल’, अपने दर्शकों को एक अनुभव देने के लिए बनाया गया था। एक मिलियन वर्ग फीट में शामिल, विवियाना मॉल अपने प्रमुख खुदरा और अवकाश स्थान में 250 से अधिक अग्रणी ब्रांडों को शामिल करता है। 2013 में स्थापित, यह मॉल भारत का पहला और एकमात्र दृष्टिबाधित मैत्रीपूर्ण मॉल है और इसने नेत्रहीनों के लिए एक संसाधन केंद्र “XRCVC-Viviana Extension” भी लॉन्च किया है।

लाल कालीन विवियाना मॉल में वापसविवियाना मॉल भाग्यशाली संरक्षक का स्वागत करता है!

मुंबई, ठाणे संवाददाता सतीश चौहान ठाणे महा नगर पालिका (टीएमसी) द्वारा बुधवार से ठाणे में मॉलों को फिर से खोलने की अनुमति देने के बाद ग्राहकों के स्वागत के लिए करीब छह महीने के लॉकडाउन के बाद विवियाना मॉल ने लाल वेरिफाइड कालीन बिछा कर ग्राहकों का स्वागत किया हैं।

विवियाना मॉल द्वारा आज दी गई जानकारी अनुसार पहले कुछ आगंतुकों को लगभग छह महीने की अवधि में लॉकडाउन के बाद पहले ग्राहक के रूप में मॉल जाने की सुविधा थी। पहले 10 दिनों के लिए हर दिन, 10 ग्राहकों को एक आश्चर्यजनक उपहार मिलेगा। इन 10 व्यक्तियों को दिन 10 के दौरान बेतरतीब ढंग से चुना जाएगा और उन्हें एक उपहार दिया ।

विस्तारित ब्रेक के बाद भव्य फिर से खुलने के दिन मॉल लौट रहे दुकानदार लाल कालीन से चलेंगे। दुकानदारों को शाही स्वागत देने के लिए प्रवेश द्वार पर भव्य उत्सव का माहौल बनाया है ।

मॉल में सेल्फी पॉइंट भी आम क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर विशेष सजावट और स्थापना के साथ स्थापित किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि हमारे संरक्षकों की सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रोटोकॉल आवश्यक हैं। सुश्री रीमा कीर्तिकर, मुख्य विपणन अधिकारी, विवियाना मॉल ने कहा, “उद्योग के बेंचमार्क के साथ स्वच्छता और स्वच्छता, सतर्कता कर्मचारी और मॉल भागीदार यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे ग्राहकों को न केवल एक महान अनुभव प्राप्त हो, बल्कि यह सुरक्षित और स्वस्थ भी हो। “

“हम सभी मॉल के फिर से खुलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। एक जिम्मेदार शॉपिंग सेंटर के रूप में हमने आपके परिसर को सुरक्षित करने के लिए हर संभव सावधानी बरती है। हम और सभी आगंतुकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए कोविद -1 सुरक्षा के सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें।
विवियाना मॉल के सीईओ मनोज अग्रवाल ने बताया कि एक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के रूप में, हर रात मेहमानों के स्वागत के लिए पूरे मॉल क्षेत्र को कीटाणुरहित किया जाएगा। हमने नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए कई अन्य उपायों को अपनाया है। मॉल की सुरक्षा और स्वच्छता प्रक्रियाओं को लंदन में RSM संस्थान परामर्श द्वारा प्रमाणित किया गया सोना है ।

मॉल के प्रबंधन ने सभी प्रवेश द्वारों पर एक सफाई सुरंग लगाई है, जिसमें पराबैंगनी अंकुरण विकिरण (UVGI) उपचार और बैग स्कैनिंग शामिल हैं। कोयला को लगातार साफ और कीटाणुरहित रखने के लिए यूवीजीआई तकनीक को एयर कंडीशनिंग सिस्टम में शामिल किया गया है। अन्य एहतियाती उपायों जैसे कि लेव मार्किंग, फूड कोर्ट में अंतराल, स्टोर तक सीमित पहुंच, बढ़ती स्वच्छता, नियमित रूप से गहरी सफाई और चिमनी के लिए विवियाना मॉल प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है।

इसके अलावा, मॉल ने अपने रक्षक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पराबैंगनी विकिरण (यूवी किरणों) के साथ मॉल के सभी सामान्य क्षेत्रों को कीटाणुरहित करने की पूरी कोशिश की है। विवियाना मॉल ने नीचे से ऊपर की तरफ एस्कलेटर बेल्ट्स को साफ करने के लिए यूवी लाइट्स लगाई हैं।

VIVIANA MALL के बारे में: विविआना मॉल, एक प्रसिद्ध ‘डेस्टिनेशन मॉल’, अपने दर्शकों को एक अनुभव देने के लिए बनाया गया था। एक मिलियन वर्ग फीट में शामिल, विवियाना मॉल अपने प्रमुख खुदरा और अवकाश स्थान में 250 से अधिक अग्रणी ब्रांडों को शामिल करता है। 2013 में स्थापित, यह मॉल भारत का पहला और एकमात्र दृष्टिबाधित मैत्रीपूर्ण मॉल है और इसने नेत्रहीनों के लिए एक संसाधन केंद्र “XRCVC-Viviana Extension” भी लॉन्च किया है।

ठाणे जेपी में विषय समिति अध्यक्षों के खातों का आवंटन

मुंबई, ठाणे संवाददाता सतीश चौहान ठाणे जिला परिषद अध्यक्ष सुषमा लोन ने 15 जुलाई 2020 और 30 जुलाई 2020 को हुए चुनावों में चुने गए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की अध्यक्षता पीठासीन अधिकारी और उप प्रभागीय अधिकारी द्वारा की गई । बैठक की मंजूरी के साथ विभिन्न विषय समितियों के अध्यक्षों को खाते आवंटित किए गए थे। इसके लिए जिला परिषद की विशेष बैठक का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किया गया।
उपाध्यक्ष सुभाष पवार, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ। रूपाली सतपुते, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) डी। वाई जाधव (और सदस्य सचिव) के साथ-साथ जिला परिषद के सदस्य वीडियो कांफ्रेंस द्वारा उपस्थित थे।

निम्नलिखित खाते उप-अध्यक्ष और विषय समिति के अध्यक्ष को आवंटित किए गए थे।

1) सुभाष पवार को वित्त और शिक्षा समिति

2) कुंदन पाटिल को निर्माण और स्वास्थ्य समिति

3) संजय निमसे को कृषि, पशुपालन और डेयरी समिति

रत्नाप्रभा तरमाले को ठाणे जिला परिषद की महिला और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है, जबकि नंदा उघाड़ा को पहले ही समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है।
बैठक में विभिन्न समितियों पर रिक्त पदों को भरने को भी मंजूरी दी गई। सरकार द्वारा जारी कोविद 19 के नियमों का पालन करते हुए बैठक आयोजित की गई थी।

ठाणे जेपी में विषय समिति अध्यक्षों के खातों का आवंटन

मुंबई, ठाणे संवाददाता सतीश चौहान ठाणे जिला परिषद अध्यक्ष सुषमा लोन ने 15 जुलाई 2020 और 30 जुलाई 2020 को हुए चुनावों में चुने गए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की अध्यक्षता पीठासीन अधिकारी और उप प्रभागीय अधिकारी द्वारा की गई । बैठक की मंजूरी के साथ विभिन्न विषय समितियों के अध्यक्षों को खाते आवंटित किए गए थे। इसके लिए जिला परिषद की विशेष बैठक का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किया गया।
उपाध्यक्ष सुभाष पवार, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ। रूपाली सतपुते, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) डी। वाई जाधव (और सदस्य सचिव) के साथ-साथ जिला परिषद के सदस्य वीडियो कांफ्रेंस द्वारा उपस्थित थे।

निम्नलिखित खाते उप-अध्यक्ष और विषय समिति के अध्यक्ष को आवंटित किए गए थे।

1) सुभाष पवार को वित्त और शिक्षा समिति

2) कुंदन पाटिल को निर्माण और स्वास्थ्य समिति

3) संजय निमसे को कृषि, पशुपालन और डेयरी समिति

रत्नाप्रभा तरमाले को ठाणे जिला परिषद की महिला और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है, जबकि नंदा उघाड़ा को पहले ही समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है।
बैठक में विभिन्न समितियों पर रिक्त पदों को भरने को भी मंजूरी दी गई। सरकार द्वारा जारी कोविद 19 के नियमों का पालन करते हुए बैठक आयोजित की गई थी।