ब्लाक प्रमुख ने किया 7 लाख की लागत से इंटरलॉकिंग मार्ग का लोकार्पण


औराई, भदोही:-स्थानीय ब्लॉक प्रमुख श्री बृजमोहन मिश्रा” विकास” द्वारा ग्राम लमसड़ा में वर्ष 2019-2020 के राज्य वित्त योजनान्तर्गत आज 3 सितम्बर गुरुवार को लमसड़ा में लिंकरोड मिडिल स्कूल से प्रफुल्ल तिवारी के मकान तक 7 लाख की लागत से बनी 160 मीटर इंटरलाकिंग रोड का लोकांर्पण कार्यक्रम सम्पन्न किया गया।. इस मौके पर विद्यालय प्रिंसिपल ओमकार नाथ तिवारी , रविंद्र तिवारी , कमला शंकर दुबे, चौबे , चंद्रकांत दूबे , कृपा शंकर दुबे, संतोष पांडेय,रिंकू एडवोकेट, गोलू नेता, साधु तिवारी ,राजू तिवारी, अनुराग दुबे, धीरज मिश्रा,,
विकास तिवारी , अवधेश तिवारी, सर्वेश मिश्रा”सुहाना”, सिक्की यादव, देवा, रामराज तिवारी, गुलाब दूबे आदि सहित तमाम गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।देखने व पढ़ने के लिए बने रहिये पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

ब्लाक प्रमुख ने किया 7 लाख की लागत से इंटरलॉकिंग मार्ग का लोकार्पण


औराई, भदोही:-स्थानीय ब्लॉक प्रमुख श्री बृजमोहन मिश्रा” विकास” द्वारा ग्राम लमसड़ा में वर्ष 2019-2020 के राज्य वित्त योजनान्तर्गत आज 3 सितम्बर गुरुवार को लमसड़ा में लिंकरोड मिडिल स्कूल से प्रफुल्ल तिवारी के मकान तक 7 लाख की लागत से बनी 160 मीटर इंटरलाकिंग रोड का लोकांर्पण कार्यक्रम सम्पन्न किया गया।. इस मौके पर विद्यालय प्रिंसिपल ओमकार नाथ तिवारी , रविंद्र तिवारी , कमला शंकर दुबे, चौबे , चंद्रकांत दूबे , कृपा शंकर दुबे, संतोष पांडेय,रिंकू एडवोकेट, गोलू नेता, साधु तिवारी ,राजू तिवारी, अनुराग दुबे, धीरज मिश्रा,,
विकास तिवारी , अवधेश तिवारी, सर्वेश मिश्रा”सुहाना”, सिक्की यादव, देवा, रामराज तिवारी, गुलाब दूबे आदि सहित तमाम गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।देखने व पढ़ने के लिए बने रहिये पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

सीडीओ ने औराई ब्लाक का किया औचक निरीक्षण, 15 मिले अनुपस्थित।


भदोही। वृहस्पतिवार को औराई ब्लाक पर धमके सीडीओ ने अवलोकन में मनरेगा कार्य के बारे में जानकारी और लोगो से जुडे कई सवाल भी पूछे। संतोषजनक जबाव न मिलने पर सीडीओ विवेक त्रिपाठी नाराज भी दिखे। इसके बाद सीडीओ ने उन कर्मचारियों पर भी नाराजगी दिखाई जो लोग समय से कार्यालय नही पहुंच पाये थे। सीडीओ ने अनुपस्थित मिलने वाले सभी कर्मचारियों के वेतन रोकने और उनके सम्बन्धित रिपोर्ट की देने का निर्देश दिया। सीडीओ के इस औचक निरीक्षण के दौरान पूरे ब्लाक परिसर में गहमागहमी दिखी। और जो लोग उपस्थित थे सभी लोग अपने कार्यों को बढे ही तल्लीनता से करते दिखे। हालांकि अनुपस्थित कर्मियों पर कार्यवाही की बात को लेकर काफी चर्चा होती रही।देखने व पड़ने के लिए बने रहिये पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

दुर्गागंज के खेमापुर निवासी व्यक्ति ने लगाई न्याय की गुहार।


भदोही। दुर्गागंज थाना क्षेत्र के खेमापुर निवासी प्रेम शंकर मिश्र ने अपने ऊपर हुई ज्यादती को लेकर प्रशासन ने न्याय की गुहार लगाई है।
प्रेमशंकर मिश्र का कहना है कि एक जमीन का विवाद चल रहा है और वह दीवानी न्यायालय में लंबित है फिर भी बीते 29 अगस्त को पडोसी लोग जबरदस्ती आकर घर के पास लगा केला का पेड काटने लगे और नाली खोदने लगे। और वे लोग निर्धारित जमीन से अधिक कब्जा किये है फिर भी विवाद करते है। और उस दिन विरोध करने पर विपक्षी के घर के कई लोग आकर प्रेमशंकर और उनके परिजनों की लाठी डंडे से पिटाई कर दी। जिसमें उनके घर की महिलाएं भी शामिल थी। जिससे प्रेमशंकर को काफी चोट लगी। साथ में दिव्यांग बेटे पर भी हमला किया। बताया कि पुलिस से शिकायत किया तो पुलिस ने केवल एनसीआर दर्ज करके मेडिकल के लिए भेज दिया। मेडिकल के लिए सुरियावां, सोनभद्र और वाराणसी तक जाना पडा। प्रेमशंकर ने बताया कि पुलिस शिकायत के बाद भी मौके पर नही आई। और नही विपक्षियों पर कार्यवाही कर रही है। साथ में विपक्षी लोग जान से मारने की धमकी भी दे रहे है। और अपनी जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई। प्रेमशंकर ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। देखने व पढ़ने के लिए बने रहिये पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

कंसरायपुर में हुआ जमीनी पैमाइस


भदोही। कई दिनों से भदोही ब्लाक के कंसरायपुर में चल रहे आपसी जमीनी विवाद को लेकर वृहस्पतिवार को पैमाइस की कई। जिसमें दोनों पक्षों के लोगो की जमीन को चिन्हित करके बता दिया गया।
जानकारी के मुताबिक कंसरायपुर निवासी कैलाशनाथ दूबे समेत कई लोगो ने तहसील में गांव में स्थित एक विवादित जमीन की पैमाइस के लिए आवेदन किया था। और वृहस्पतिवार को कानूनगो जीतेन्द्र श्रीवास्तव और लेखपाल मोहन लाल और दिनेश कुमार की मौजूदगी में पैमाइश करके जमीन को चिन्हित किया गया। और दोनो पक्षो की सहमति से मामला शांत हो गया। इस मौके पर ग्राम प्रधान अशोक यादव समेत ग्रामसभा के यज्ञनारायण दूबे, आशाराम दूबे, मंशाराम दूबे समेत कई सम्मानित लोग भी मौजूद थे। देखने व पढ़ने के लिए बने रहिए पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

ट्रक के धक्के से युवक की घटनास्थल पर दर्दनाक मौत।


गोपीगंज। रास्ट्रीय राजमार्ग के मिर्ज़ापुर तिराहे के पास ट्रक की चपेट में आने से एक अज्ञात युवक 25 की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत।
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना के संबंध में बताया जाता है कि साईकिल सवार युवक बाजार से संभवतः अपने घर की तरफ वापस जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही मिर्ज़ापुर तिराहे के समीप पहुंचा ही था कि पीछे से आ रही ट्रक ने साईकिल सवार युवक को पीछे से धक्का मारा जिससे खराब सड़क होने की वजह से वही पर गिर गया और ट्रक ड्राइवर कंट्रोल नही कर पाया और ट्रक की चपेट में आ गया वही घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। नागरिकों के शोर करने पर ड्राइवर गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने युवक की शिनाख्त कराने की कोशिश की पर शिनाख्त नही हो पाया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही ट्रक को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्यवाही कर रही है। समाचार लिखे जाने तक शिनाख्त नही हो पाई थी। देखने और पढ़ने के लिए बने रहिए पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

ट्रक के धक्के से युवक की घटनास्थल पर दर्दनाक मौत।


गोपीगंज। रास्ट्रीय राजमार्ग के मिर्ज़ापुर तिराहे के पास ट्रक की चपेट में आने से एक अज्ञात युवक 25 की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत।
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना के संबंध में बताया जाता है कि साईकिल सवार युवक बाजार से संभवतः अपने घर की तरफ वापस जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही मिर्ज़ापुर तिराहे के समीप पहुंचा ही था कि पीछे से आ रही ट्रक ने साईकिल सवार युवक को पीछे से धक्का मारा जिससे खराब सड़क होने की वजह से वही पर गिर गया और ट्रक ड्राइवर कंट्रोल नही कर पाया और ट्रक की चपेट में आ गया वही घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। नागरिकों के शोर करने पर ड्राइवर गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने युवक की शिनाख्त कराने की कोशिश की पर शिनाख्त नही हो पाया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही ट्रक को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्यवाही कर रही है। समाचार लिखे जाने तक शिनाख्त नही हो पाई थी। देखने व पढ़ने के लिए बने रहिए पवन पुरवईया न्यूज़ पर पूरे सतीश चौहान के साथ

मुख्यमंत्री जी! ‘उत्तर प्रदेश सरकार’ लिखी गाड़ी का बीमा फेल क्यो?

भदोही। सरकार भले ही यातायात को सुचारू ढंग से चलाने के लिए नियम कानून बनाई है। और बनाये गये नियम कानून का पालन कराने में स्थानीय पुलिस और प्रशासन के लोग काफी सक्रिय रहते है। जिसका उदाहरण बाजार और नगर में देखा जा सकता है। और खास बात यह भी दिखती है कि प्रशासन के इस सख्ती में अधिकतर सामान्य आदमी ही पकडा जाता है। क्योकि कुछ लोग पुलिस होते है तो कुछ सत्ता दल के नेता के आदमी या कार्यकर्ता या कुछ लोग परिचित तो कुछ लोग पत्रकार होते है जिन पर पुलिस के लोग कार्यवाही बहुत कम संख्या में देखे जाते है। और इसी पक्षपात की वजह से लोग सरकार और सरकारी कार्य के नाम पर खुलेआम धज्जियां उडाते है। और जिम्मेदार लोग भी ऐसे लोगो के सामने अपनी जिम्मेदारी भूल जाते है।
एक ऐसा ही मामला सोमवार को भदोही जिले के गोपीगंज थाना अन्तर्गत दिखा जहां पर एक ऐसी इनोवा गाडी(UP 70 EK 2525) देखी गई जिस पर लिखा तो है उत्तर प्रदेश सरकार लेकिन साहब के गाडी का इन्सुरेंस डेढ माह से फेल है। लेकिन साहब पर इसका कोई फर्क नही है क्योकि गाडी पर जो उत्तर प्रदेश सरकार का लेवल लगा है। साहब की बात तो छोडिये। पिछले डेढ महिने से यह इनोवा गाडी पता नही कहा कहा गई होगी लेकिन साहब को कोई यह नही बताया कि गाडी का इन्सुरेंस फेल है। या हो सकता है कि कोई साहब को बताया भी हो लेकिन साहब को तो किसी का तनिक भी भय नही था क्योकि गाडी पर जो उत्तर प्रदेश सरकार जो लिखा है। लेकिन यह इनोवा कार सोमवार को तब पकड में आई जब जंगीगंज में एक साइकिल सवार को टक्कर मारते हुए आगे निकल गई। और सरकार के नाम पर समाज को गुमराह करने वाले साहब की पोल खुल गई। अब यहां सवाल पैदा होता है कि आखिर इस तरह लोग सरकार के नाम को अपने गलत कार्यों से क्यों बदनाम करते है? सरकार को इस तरह की लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। और स्थानीय प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है कि सभी के साथ समान व्यवहार करे। न कि केवल आम आदमी के साथ सख्ती और खास आदमी के साथ नरमी से पेश आये।देखने व पढ़ने के लिए बने रहिये पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

देश में ‘प्रतियोगी’ युवाओं के ‘अच्छे दिन’ की शुरूआत।


देश में आज भी युवा सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देते है और उनका सपना रहता है कि वे पढ लिखकर एक अच्छे पद पर जाकर सरकारी नौकरी करेंगे और देश व समाज की सेवा करेंगे। लेकिन सरकारी नौकरी पाने के लिए कितनी मेहनत और लगन की जरूरत होती है यह किसी प्रतियोगी युवा से अधिक कोई नही जान सकता है। और यही मेहनत और लगन उस युवा को आगे बढने में सहायक होता है। लेकिन सरकारी नौकरी पाने में कुछ ऐसी भी दिक्कते पाई जाती है जो प्रतियोगी के मेहनत और लगन से अलग होती है। वे चीजे है परीक्षाओं की अधिकता, परीक्षा केन्द्रों की दूरी, भाषा की समस्या इत्यादि लेकिन अब सरकार ने करीब हर वर्ष तीन करोड़ प्रतियोगी परीक्षा में सम्मिलित होने वाले युवाओं के समस्या को ध्यान में रखकर एक अहम फैसला लिया है। जो बेशक प्रतियोगी युवाओं के लिए काफी ‘सहायक’ साबित होगा।
केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेडकर ने सरकार के तरफ युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं मे ‘राहत’ की घोषणा की। जिसमें बताया गया कि अगले वर्ष से एसएससी, बैंक और रेलवे के लिए आयोजित होने वाली प्रारम्भिक परीक्षा अलग अलग न होकर अब केवल एक ही होगी। जिसमें युवा अपने स्वेच्छा से एसएससी, बैंक अथवा रेलवे की मुख्य परीक्षा में अगले तीन वर्ष तक सम्मिलित हो सकेगा। इस बदलाव से उन युवाओं को काफी सहूलियत मिलेगी जो इन विभागों की प्रारम्भिक परीक्षा की अलग अलग तैयारी करते थे। अब केवल ‘कामन इलिजबिलिटी टेस्ट’ के माध्यम से प्राप्त अंकों के हिसाब से बैंक, रेलवे और एसएससी की मुख्य परीक्षा में सम्मिलित होने का मौका मिलेगा।
पहले विभिन्न परीक्षाओं को आयोजित कराने के लिए करीब दो दर्जन एजेंसियां कार्य करती थी लेकिन अब केवल ‘नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी’ के माध्यम से परीक्षाएं आयोजित कराने का प्रावधान है। युवाओं के लिए राहत भरी खबर यह भी है कि अब इन परीक्षाओं को हिन्दी, अंग्रेजी के अलावा अपनी क्षेत्रीय भाषा में भी देने का विकल्प चुन सकते है। जो प्रतियोगी युवाओं के लिए काफी अच्छा विकल्प है। इस बदले हुए तरीके में अब केवल बडे शहरों में ही परीक्षाएं आयोजित नही होंगी बल्कि देश के सभी जिलों में इसका आयोजन होगा। जिससे युवा अपने जिले के बाहर जाने वाली समस्या से मुक्त रहे। हालांकि परीक्षा केन्द्र चुनने का विकल्प परीक्षार्थी पर ही रहेगा। वह अपने विकल्प के माध्यम से शहर चुन सकता है जहां वह प्रारम्भिक परीक्षा देना चाहता है। इस परिवर्तन के बाद महिला प्रतियोगियों को काफी सहूलियत रहेगी जो दूर आयोजित होने वाली परीक्षाओं में काफी दिक्कतों का सामना करती थी। इस बदलाव के बाद काफी राहत रहेगी। इस बदलाब के बाद परीक्षा में ‘भीड’ की कमी भी देखने को मिल सकती है। क्योकि अभी तक एक ही युवा अलग अलग परीक्षाओं के लिए अलग अलग आवेदन करता था। जो कही न कही भीड बढाने मे सहायक होता था लेकिन इस बदलाव के बाद एक ही आवेदन के माध्यम से युवाओं को तीन प्रारम्भिक परीक्षाओं में बैठने से छुटकारा मिल जायेगा। और अगले दिन वर्ष तक बैंक, रेलवे और एसएससी की मुख्य परीक्षा में सम्मिलित हो सकता है। इस बदलाव से बेशक युवाओं के दिमाग में जो परीक्षा को लेकर तनाव बना रहता है उससे काफी राहत मिलेगी। और युवा पूरे मनोयोग से अपनी प्रारम्भिक परीक्षा की तैयारी करेगा।
सरकार के इस फैसले के बाद भविष्य में प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए ‘अच्छे दिन’ की शुरूआत है जो उनके कैरियर के लिए एक सही मार्ग प्रशस्त कर रहा है। अभी हाल ही में सरकार ने शिक्षा नीति में बहुत ही उम्दा बदलाव करके विद्यार्थियों के लिए एक ‘सरल’ और ‘सही’ निर्णय लिया ठीक उसी तरह सरकार अब प्रतियोगी परीक्षाओं में भी ‘सरलीकरण’ करके प्रतियोगियों के मन में उर्जा का संचार कर दिया। बेशक सरकार के इस फैसले से युवाओं को काफी राहत मिलेगी और वे अपने लक्ष्य को पाने में और मजबूत साबित होंगे।देखने व पढ़ने के लिए बने रहिये पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ

श्रद्धा और विश्वास का महापर्व , पितृपक्ष


पूर्वजों को श्रद्धासुमन अर्पित करने का महापर्व है, पितृपक्ष। कहा गया है जो श्रद्धा से किया गया हो उसे श्राद्ध कहते हैं। देवऋण, ऋषिऋण और पितृऋण यह तीन ऋण हमारे शास्त्रों में हमें बतलाया गया है। प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अश्वनी कृष्ण अमावस्या तक पितृपक्ष, श्राद्ध होते हैं। श्राद्ध यानी श्रद्धा , ब्रह्मपुराण के अनुसार जो भी वस्तु उचित कार्य अथवा स्थान पर पितरों के नाम उचित विधि-विधान द्वारा ब्राह्मणों को श्रद्धा पूर्वक प्रदान किया जाए वह श्राद्ध कहलाता है। श्राद्ध में तिल, चावल, जौ आदि का अधिक महत्व है, साथ ही पुराणों में इस बात का उल्लेख है कि श्राद्ध में तिल और कुशा का सर्वाधिक महत्व होता है। वैदिक परंपरा के अनुसार पितरों का श्रद्धा से श्राद्ध करना उत्कृष्ट कार्य हैं। एक पुत्र का जीवन तभी सार्थक है, जब वह अपने जीवित माता-पिता की सेवा करें और उनके मरणोपरांत उनकी मृत्यु-तिथि पर पितृपक्ष में उनका श्रद्धा-पूर्वक, विधि-विधान से श्राद्धकर्म करें। मान्यता अनुसार पितृपक्ष में पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का सहज उपाय है। गया, गंगासागर, कुरुक्षेत्र, चित्रकूट, पुष्कर, हरिद्वार सहित अन्य तीर्थ स्थलों में पितरों को श्रद्धा पूर्वक श्राद्धकर्म किया जाता है। सनातन धर्म और वैदिक मान्यताओं में पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का सहज व सरल मार्ग भी माना जाता है। श्राद्धपक्ष का महात्म्य उत्तर व
उत्तरपुर्व-भारत में अधिक है। दक्षिण भारत व महाराष्ट्र के विभिन्न अंचलों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यह भी मान्यता है कि पितृपक्ष में किए गए दान से पितरों की आत्मा को संतुष्टि मिलती है और पितृदोष भी समाप्त हो जाता है। श्राद्ध के दौरान गाय,घृत, अनाज, वस्त्र, तिल, भूमि, नमक आदि दान करने का भी परंपरा सदियों से चला आ रही है। ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितरगण धरती पर अपनों के पास आते हैं और अमावस्या को उनकी विदाई होती है। इस दिन श्रद्धा से श्राद्ध व दान करने व धूप, दीप, नैवेद्य अर्पण करने से मानसिक शांति के साथ घर में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता यह भी है कि इस अमावस्या को पितृगण अपने परिजनों के द्वार श्रद्धादि की इच्छा लेकर आते हैं, यदि उन्हें श्रद्धा पूर्वक पिंडदान आदि न किया जाए तो वह असंतुष्ट ही वापस चले जाते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में नाना प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है इसलिए श्रद्धा पूर्वक विश्वास के साथ श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। पितृपक्ष का श्राद्ध मूलतः एक पारिवारिक कृत्य हैं।, भारतीय सनातन परंपरा में अपने दिवंगत माता-पिता के लिए प्रतिवर्ष पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान करने का शाष्त्रीय विधान है। वायुपुराण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि श्राद्ध करने की दृष्टि से अपने पुत्र को गया में आया हुआ देख पितृगण अत्यंत प्रसन्न होकर उत्सव मनाते हैं।वर्तमान समय में अत्यंत ध्यानागत तथ्य यह है कि आज परिवार का वह सदस्य, जो पुत्र के रूप में परिवार को संचालित कर रहा है, वह अपने पुत्र का पिता भी है, वह अपने पोते का दादा भी है, अर्थात अपनी जिन दिवंगत तीन पीढ़ियों का वह श्रद्धा पूर्वक श्राद्ध कर रहा है, उसके पीछे उतनी ही पीढियां खडी है। आज वह पुत्र के रूप में अपने पिता को जो श्रद्धा से श्राद्ध निवेदित कर रहा है, वहां उपस्थित उसका पुत्र को भी इस दायित्व का बोध भी होता है। इस प्रकार संबंध का यह श्रृंखला सतत चलता रहता है। इस प्रकार श्रृंखला-सेतु बनाने का यह पावन पर्व पितृपक्ष ही है। परिवार का वह बाल-सदस्य जो अपने दिवंगत पूर्वजों से अपरिचित रहता है, इस अवसर पर वह कौतूहलवश सब का परिचय पूछता है। इस प्रकार पारिवारिक संबंधों के सुदृढ़ीकरण में पितृपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज के न्यूक्लियर फैमिली सिस्टम में भले ही भौतिक संसाधनों की प्रचुरता हो, उसमें आधुनिक सुख-साधन के सारे यंत्र-तंत्र मौजूद हों परंतु वहां के सारे संबंध में ताप-तनाव,कुंठा, संत्रास से सत्रंस्त हैं, उनका एकमात्र कारण है, उपयुक्त पारिवारिक संबंधों की व्यापकता का आभाव, सचमुच यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। जब हम तर्पण के समय पितरों को मन से याद करते हैं तो उस समय उनके साथ अपने पारिवारिक संबंधों को भी याद अवश्य करते हैं, उनका चलचित्र सम्मुख प्रकट हो ही जाता है। इससे सहज ही उनके अतीत के सारे सुकृत्य सामने आ जाते हैं। हमारे मन-प्राण भावुक हो जाते हैं। ना केवल हाथ की अंगुलियों वरन दोनों आंखों की अश्रू धाराओं से तर्पण होने लगता है। सच तो यही है कि परिवार मात्र ईट, पत्थर, सीमेंट से बना घर नहीं है, वह इस सात्विक संबंधों का पावन समुच्चय है। इन्हीं संबंधों से एक आदर्श परिवार को सुरक्षित एवं संरक्षित रखा जा सकता है। आज के आज के टूटते-बिखरते, पारिवारिक परिवेश में पितृयज्ञ एक संजीवनी की तरह है जो सभी परिस्थितियों में पारिवारिक संबंधों का कायाकल्प करने की क्षमता रखता है। आवश्यकता है तो सिर्फ व्यक्ति मे श्रद्धा भाव की वह भी पूर्ण विश्वास के साथ।देखने व पढ़ने के लिए बने रहिये पवन पुरवईया न्यूज़ पर सतीश चौहान के साथ