भदोही में राजस्व विभाग के कर्मी ने पीडि़त से ली ‘रिश्वत, पीडित ने की शिकायत।


भदोही। भले ही सरकार भ्रष्टाचार निवारण और इस पर सख्ती की बात करती है लेकिन सरकार की यह मंशा केवल हवा हवाई के अलावा कुछ नही है क्योकि सरकारी कर्मचारी अपनी पुरानी आदतों की वजह से सरकार के आदेश की खुलेआम धज्जियां उडाते है। और जनता के मन में सरकार के खिलाफ नाराजगी होती है। एक खास बात और देखने को मिलती है कि कुछेक मामले में जिम्मेदार अधिकारी को मामले की जानकारी होती है इसके बावजूद भी कोई कार्यवाही नही होती है। और पीडित दर दर की ठोकर खाने पर विवश होता है।
एक मामला भदोही तहसील के कंसरायपुर गांव का प्रकाश में आया है जहां पर राजस्व कर्मियों ने पीडित से काम पूरा कराने के नाम मोटी रकम ली है और कई माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही न हुई।
पीडित संतोष कुमार दूबे ने बताया कि उनके एक जमीन की पैमाइस होनी थी जिसके लिए उन्होने दो हजार का बैंक से चालान जमा किया। और बीस हजार नकद रिश्वत लेने के बाद क्षेत्रीय लेखपाल और कानूनगो ने बीते आठ अगस्त को पैमाइस की। और तीन माह बाद भी अभी तक तहसीलदार या एसडीएम के पास तक पैमाइस की फाइल नही पहुंची है। और जब भी पीडित लेखपाल या कानूनगो से बात करता है तो वे लोग और भी सुविधा शुल्क मांगते है। और इसी के नाम पर बीस हजार के अलावा कई बार हजार पांच सौ लेकर पीडित को मूर्ख बनाते है। पीडित ने बीते तहसील दिवस पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित का कहना है कि जब तक प्रशासन के तरफ से आदेश नही प्राप्त हो जाता तब तक आसपास के खेत के खाताधारक जमीन पर निर्माण नही करने देना चाहते है और विवाद करना चाहते है। लेकिन पैमाइस के तीन माह बाद भी क्षेत्रीय लेखपाल और कानूनगो ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को नही भेजी है। संतोष कुमार की आशंका है कि ये राजस्वकर्मी काम के लिए और मोटी रकम मांग रहे है और मै उतना देने में असमर्थ हूं। शायद इसी वजह से फाइल को उच्च अधिकारी के पास नही भेज रहे है। हालांकि पीड़ित ने कहा कि अब यह मामला उच्च अधिकारी के संज्ञान में आने पर हो सकता है मेरे साथ न्याय हो।
भदोही तहसील के इस मामले को लेकर तो यह बात स्पष्ट हो गई की तहसील में रिश्वत का खुला खेल चल रहा है। और उच्च अधिकारी इस तरह विभाग और सरकार को बदनाम करने वालों पर अपनी कृपा बनाये हुए है।

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